UPI का जुलाई में नया रिकॉर्ड, 2366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए:कुल ₹29.88 लाख करोड़ की वैल्यू का लेनदेन हुआ, FASTag वॉल्यूम 4% घटा
राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने नया मासिक रिकॉर्ड बना लिया। इस महीने में कुल 2366 करोड़ (23.66 बिलियन) ट्रांजैक्शन हुए, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। इससे पहले मई में 2320 करोड़ और जून में 2272 करोड़ ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे। जून की तुलना में जुलाई में वॉल्यूम में 4.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि सालाना आधार पर यह वृद्धि 22 प्रतिशत रही।
ट्रांजैक्शन वैल्यू भी नई ऊंचाई पर
इन ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू 29.88 लाख करोड़ रुपये रही। जून में यह आंकड़ा 28.92 लाख करोड़ रुपये था, यानी मासिक आधार पर 3.3 प्रतिशत की वृद्धि। पिछले साल जुलाई की तुलना में वैल्यू में 19 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जब यह 25.08 लाख करोड़ रुपये थी। रोजाना औसतन 76.3 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी औसत दैनिक वैल्यू लगभग 96,383 करोड़ रुपये रही।
रोजमर्रा के इस्तेमाल से मिली रफ्तार
विशेषज्ञों के अनुसार, जुलाई में कोई खास त्योहार या तिमाही समापन जैसी घटना नहीं थी, फिर भी रिकॉर्ड बना। यह दर्शाता है कि UPI अब केवल विशेष अवसरों का माध्यम नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लोग स्थानीय खरीदारी, रिचार्ज, बिल भुगतान और पैसे ट्रांसफर के लिए इसे अपना रहे हैं। QR कोड और स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच ने इसे और आसान बना दिया है।
FASTag में गिरावट
इसके विपरीत, FASTag (NETC) के ट्रांजैक्शन में गिरावट देखी गई। जुलाई में FASTag के जरिए 34.7 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जो जून के 36.2 करोड़ से करीब 4 प्रतिशत कम है। सालाना आधार पर भी गिरावट रही। वैल्यू भी घटकर 7143 करोड़ रुपये रह गई, जो जून में 7215 करोड़ रुपये थी।
अन्य भुगतान प्रणालियों का हाल
IMPS में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और वैल्यू दोनों में बढ़ोतरी हुई। AePS (आधार सक्षम भुगतान प्रणाली) में भी 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ये आंकड़े डिजिटल भुगतान के विस्तार को और मजबूत करते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
UPI अब भारत के अलावा UAE, सिंगापुर, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर समेत लगभग 10 देशों में सक्रिय है। यह भारत को ग्लोबल फिनटेक लीडर के रूप में स्थापित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि टियर-2, टियर-3 और ग्रामीण बाजारों में बढ़ती स्वीकार्यता से आगे भी UPI की रफ्तार बनी रहेगी।
कुल मिलाकर, जुलाई 2026 का यह रिकॉर्ड भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती का सबूत है। UPI ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कैशलेस भारत का सपना तेजी से साकार हो रहा है।
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