रांची में भूख हड़ताल पर बैठे एक प्रदर्शनकारी की तबीयत बिगड़ी, ले जाया गया अस्पताल

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रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के खिलाफ छात्र पिछले दो हफ्तों से ज्यादा समय से धरना और अनशन कर रहे हैं। इस आंदोलन के 14वें दिन शुक्रवार (7 अगस्त 2026) को भूख हड़ताल पर बैठे एक प्रदर्शनकारी राहुल क्रांति (राहुल) की तबीयत अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया।

तबीयत बिगड़ने का कारण और चिकित्सा स्थिति

राहुल मंगलवार रात से भूख हड़ताल पर थे। शुक्रवार सुबह उनकी हालत खराब होने पर डॉक्टर दिव्यांशु ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ गया था, जिससे तेज सिरदर्द हो रहा था। उन्हें बुखार की शिकायत भी थी। इसलिए उन्हें तुरंत एंबुलेंस से सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट किया गया। अन्य अनशनकारियों की स्थिति सामान्य बताई गई और उनके वाइटल चेक किए गए। इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से स्वास्थ्य जांच की अपील की थी, लेकिन सुबह 8:30 बजे तक कोई डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचा था।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

छात्र जेपीएससी, जेएसएससी सीजीएल और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित ओएमआर शीट लीक, धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे हैं। वे सीबीआई जांच, परीक्षा सुधार और कुछ परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्रनाथ महतो कई दिनों से अनशन पर हैं। मंगलवार रात दो महिलाओं सहित पांच और प्रदर्शनकारी उनके साथ जुड़ गए, जिससे अनशनकारियों की संख्या छह हो गई। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने महतो से फोन पर बात की और पानी पीने की अपील की, जिसके बाद उन्होंने पानी लेना शुरू किया।

रांची में भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारी की तबीयत बिगड़ी

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

आंदोलन स्थल पर बारिश, भूख और अनिश्चित भविष्य के बीच छात्र डटे हुए हैं। गुरुवार देर रात एसडीओ और एडीएम ने छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। आज फिर वार्ता की संभावना है। छात्र विधानसभा घेराव की भी योजना बना रहे हैं, क्योंकि सत्र चल रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं आया है, जिससे छात्रों में नाराजगी बढ़ी है। कुछ छात्र नेता मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग तक कर चुके हैं।

छात्रों की स्थिति और आगे की योजना

भूख हड़ताल लंबे समय तक चलने से कई प्रदर्शनकारियों की हालत कमजोर हो रही है। फिर भी वे अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। दो छात्र यूनियनों ने विधानसभा मार्च का ऐलान किया है। यह आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर जैसा माहौल पैदा कर रहा है। छात्रों का कहना है कि सालों से परीक्षाओं में गड़बड़ी हो रही है और युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है।

निष्कर्ष

राहुल की तबीयत बिगड़ने की घटना ने आंदोलन को और गंभीर बना दिया है। स्वास्थ्य जोखिम के बावजूद छात्र डटे हुए हैं। सरकार को जल्द संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए, वरना स्थिति और बिगड़ सकती है। यह पूरा मामला झारखंड की भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता की जरूरत को उजागर करता है

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