अगस्त 2026 में सावन के महीने में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित प्रसिद्ध इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने अपने छात्रों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। छात्रावास प्रभारी मौलाना मुफ्ती अशरफ अब्बास द्वारा 5 अगस्त की शाम को लिखित आदेश जारी किया गया। इसमें छात्रों से साफ कहा गया कि वे कांवड़ मार्गों, जीटी रोड, बाजारों और उन इलाकों में बिना जरूरत न जाएं जहां से कांवड़ यात्रियों का आवागमन हो रहा है।
एडवाइजरी के मुख्य निर्देश
संस्थान ने छात्रों को निम्नलिखित बातों का सख्ती से पालन करने को कहा है:
- बिना किसी जरूरी काम के परिसर से बाहर न निकलें।
- कांवड़ रूट, जीटी रोड और भीड़भाड़ वाले इलाकों से पूरी तरह बचें।
- यदि अनिवार्य रूप से यात्रा करनी पड़े तो केवल रेल के आरक्षित कोच में ही सफर करें।
- दारुल उलूम द्वारा जारी पहचान पत्र (आईडी कार्ड) हमेशा साथ रखें।
- सूर्यास्त के बाद बिना आईडी कार्ड दिखाए किसी भी छात्र को परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सुरक्षा और अनुशासन का उद्देश्य
इस सलाह का मुख्य उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा और संस्थान के अनुशासन को बनाए रखना है। कांवड़ यात्रा हर साल लाखों शिवभक्तों द्वारा गंगा जल लेकर की जाती है। इस दौरान सड़कों पर भारी भीड़, यातायात जाम और कभी-कभी तनावपूर्ण स्थितियां बन जाती हैं। देवबंद क्षेत्र कांवड़ मार्गों के पास पड़ता है, इसलिए संस्थान ने एहतियात बरतते हुए यह कदम उठाया। भीड़भाड़ वाले इलाकों में आवाजाही से दुर्घटना या किसी अप्रिय घटना की आशंका रहती है। संस्थान चाहता है कि छात्र शांत रहें और प्रशासन तथा पुलिस के नियमों का पालन करें।
कांवड़ यात्रा का संदर्भ
कांवड़ यात्रा 2026 लगभग 11 अगस्त तक चलने वाली है। इस दौरान कुछ जगहों पर हिंसक घटनाएं भी रिपोर्ट हुईं, जिससे सामान्य नागरिकों और छात्रों दोनों के लिए सतर्कता जरूरी हो गई। दारुल उलूम ने स्पष्ट किया कि यह उपाय सुरक्षा और व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए है। छात्रों से अपील की गई कि वे अनावश्यक घूमने-फिरने से बचें और परिसर में रहकर पढ़ाई पर ध्यान दें।
संस्थान की परंपरा
दारुल उलूम देवबंद भारत के सबसे बड़े और पुराने इस्लामी संस्थानों में से एक है। यहां हजारों छात्र विभिन्न राज्यों से पढ़ने आते हैं। बड़े धार्मिक या राष्ट्रीय आयोजनों के समय संस्थान अक्सर अपने छात्रों को सतर्कता बरतने की सलाह देता है। पहले भी गणतंत्र दिवस जैसे अवसरों पर सुरक्षा को लेकर निर्देश जारी किए जा चुके हैं। यह एडवाइजरी भी उसी परंपरा का हिस्सा है।
निष्कर्ष
दारुल उलूम देवबंद की यह सलाह कांवड़ यात्रा के दौरान संभावित जोखिमों से बचने का एक व्यावहारिक और जिम्मेदार कदम है। इससे न सिर्फ छात्रों की सुरक्षा बनी रहेगी बल्कि सामाजिक सद्भाव भी बना रहेगा। कुछ दिनों की सतर्कता सभी के लिए लाभदायक साबित हो सकती है। छात्रों को परिसर में रहकर अनुशासन बनाए रखने और जरूरी काम होने पर ही नियमों का पालन करते हुए बाहर निकलने की सलाह दी गई है।
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