हाल ही में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के अगले शिखर सम्मेलन के लिए न्योते भेजे जाएंगे। पाकिस्तान 2026 में SCO की चेयरमैनशिप संभालेगा और 2027 में इस्लामाबाद में Heads of State समिट की मेजबानी करेगा। जब पूछा गया कि क्या भारत को न्योता दिया जाएगा, तो पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि “न्योते स्पष्ट रूप से भेजे जाएंगे, और यह मेजबान देश के रूप में पाकिस्तान का दायित्व है।”
यह बयान जुलाई 2026 के आसपास आया, जब पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार किर्गिस्तान में SCO विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग ले रहे थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सितंबर 2026 में SCO काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट की चेयरमैनशिप लेगा और 2027 में समिट होस्ट करेगा। SCO में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान, बेलारूस और मध्य एशियाई देश शामिल हैं। मेजबान देश को सभी सदस्य देशों के नेताओं को न्योता देना प्रोटोकॉल का हिस्सा है।
क्या पीएम मोदी इस्लामाबाद जाएंगे?
इस सवाल का जवाब फिलहाल अनिश्चित है। भारत-पाकिस्तान संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। आतंकवाद, कश्मीर मुद्दा और सीमा विवाद मुख्य बाधाएं हैं। 2024 में जब पाकिस्तान ने SCO Heads of Government बैठक (अक्टूबर 2024) के लिए पीएम मोदी को न्योता भेजा था, तब मोदी जी नहीं गए थे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उस समय भी भारत ने द्विपक्षीय बातचीत से इनकार किया था।
वर्तमान में भी स्थिति समान लगती है। भारत का रुख साफ है कि आतंकवाद समाप्त होने तक पाकिस्तान के साथ सामान्य संबंध संभव नहीं। हाल के वर्षों में पहलगाम जैसे हमलों और अन्य घटनाओं के बाद भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंक के मुद्दे पर घेरा है। SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर भारत भाग लेता है, लेकिन द्विपक्षीय स्तर पर दूरी बनाए रखता है।
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि मोदी जी के इस्लामाबाद जाने की संभावना कम है। वे किसी वरिष्ठ मंत्री या प्रतिनिधिमंडल को भेज सकते हैं। वहीं कुछ आवाजें कहती हैं कि बहुपक्षीय मंच पर भागीदारी से भारत को फायदा हो सकता है—खासकर चीन और रूस जैसे देशों के साथ समन्वय बढ़ाने में। पाकिस्तान की चेयरमैनशिप के दौरान SCO का एजेंडा चीन से प्रभावित हो सकता है, इसलिए भारत को सतर्क रहना होगा।
ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व
SCO 2001 में चीन, रूस और मध्य एशियाई देशों द्वारा सुरक्षा सहयोग के लिए शुरू हुआ। भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने। यह संगठन आतंकवाद, आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय स्थिरता पर काम करता है। पाकिस्तान पहले 2024 में Heads of Government बैठक होस्ट कर चुका है। 2027 का समिट बड़ा होगा क्योंकि यह Heads of State स्तर का है।
भारत के लिए SCO महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यूरेशिया में प्रभाव बढ़ाने का मंच है। साथ ही आतंकवाद के मुद्दे को उठाने का अवसर भी मिलता है। पाकिस्तान के लिए यह अपनी कूटनीतिक भूमिका दिखाने और चीन के साथ गठजोड़ मजबूत करने का मौका है।
अभी न्योता आधिकारिक रूप से नहीं भेजा गया है—केवल इरादा जाहिर किया गया है। अंतिम फैसला भारत सरकार का होगा। संबंधों में सुधार के बिना उच्च-स्तरीय यात्रा मुश्किल लगती है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बयान और SCO की तैयारियां इस मुद्दे को और स्पष्ट करेंगी।
संक्षेप में, पाकिस्तान प्रोटोकॉल के तहत न्योता भेजेगा, लेकिन पीएम मोदी के जाने की संभावना वर्तमान हालात में कम है। यह घटनाक्रम भारत-पाकिस्तान संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति दोनों को प्रभावित करेगा।
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