अनंत चतुर्दशी 2026: 24 या 25 सितंबर? जानें तिथि और मुहूर्त

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अनंत चतुर्दशी 2026: 24 या 25 सितंबर, कब है अनंत चतुर्दशी? नोट करें तिथि और पूजन मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है और 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधा जाता है। साथ ही यह दिन गणेशोत्सव के दसवें दिन के रूप में भी जाना जाता है, जब कई जगहों पर गणपति विसर्जन होता है। वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी को लेकर 24 और 25 सितंबर की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आइए विस्तार से जानते हैं सही तिथि, पूजन मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और गणेश विसर्जन से जुड़ी सभी जरूरी बातें।

अनंत चतुर्दशी 2026 की सही तिथि क्या है?

वैदिक पंचांग और अधिकांश विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार अनंत चतुर्दशी 2026 शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।

चतुर्दशी तिथि का आरंभ 24 सितंबर 2026 को रात लगभग 11:18 बजे होगा और इसका समापन 25 सितंबर 2026 को रात लगभग 11:06 बजे होगा। सनातन धर्म में व्रत और त्योहार उदयतिथि (सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि) के आधार पर मनाए जाते हैं। 25 सितंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए अनंत चतुर्दशी का व्रत, पूजा और गणेश विसर्जन मुख्य रूप से 25 सितंबर को ही मान्य होगा।

24 सितंबर को रात देर से तिथि शुरू होने के कारण कुछ लोग भ्रमित हो सकते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार 25 सितंबर ही सही दिन है। यह तिथि पूरे भारत में लगभग एकसमान मानी जा रही है, हालांकि स्थानीय पंचांग में सूर्योदय के समय के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।

अनंत चतुर्दशी

अनंत चतुर्दशी का धार्मिक और पौराणिक महत्व

अनंत चतुर्दशी का नाम भगवान विष्णु के अनंत रूप से जुड़ा है। ‘अनंत’ का अर्थ है अनंत, असीम या अंतहीन। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु क्षीर सागर में अनंत नाग पर शयन करते हैं। इस दिन उनकी अनंत शक्ति और संरक्षण की कामना की जाती है।

एक प्रमुख कथा राजा सुमंत और उनकी पत्नी से जुड़ी है। राजा सुमंत ने अनंत व्रत रखा था, लेकिन उनकी पत्नी ने अनंत सूत्र तोड़ दिया, जिससे दुख आया। बाद में व्रत की महिमा समझकर उन्होंने पुनः अनुष्ठान किया और सुख-समृद्धि प्राप्त की। इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि अनंत सूत्र को श्रद्धा से बांधना और व्रत का पालन करना घर में शांति, समृद्धि और संकटों से रक्षा करता है।

महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और कई अन्य राज्यों में यह दिन गणेशोत्सव का समापन भी है। गणेश चतुर्थी से शुरू हुए दस दिन के उत्सव का अंत अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन के साथ होता है। जैन धर्म में भी इस दिन भगवान वासुपूज्य की निर्वाण तिथि मानी जाती है।

अनंत सूत्र क्यों बांधा जाता है?

अनंत चतुर्दशी की सबसे खास परंपरा 14 गांठों वाला अनंत सूत्र (अनंत डोर) बांधना है। यह सूत्र आमतौर पर लाल या पीले रंग का होता है और इसमें 14 गांठें डाली जाती हैं। 14 गांठें 14 लोकों या भगवान के अनंत रूप का प्रतीक मानी जाती हैं।

पुरुष दाहिनी कलाई पर और महिलाएं बाईं कलाई पर यह सूत्र बांधते हैं। माना जाता है कि यह सूत्र बांधने से व्यक्ति को विष्णु भगवान की कृपा प्राप्त होती है, संकट दूर होते हैं, वैवाहिक जीवन सुखी रहता है और घर में समृद्धि आती है। सूत्र को पूरे वर्ष या कम से कम कुछ महीनों तक बांधे रखने की परंपरा है। कई लोग इसे अगले वर्ष की अनंत चतुर्दशी तक रखते हैं।

अनंत चतुर्दशी 2026 पूजन मुहूर्त

25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह लगभग 6:11 बजे से रात 11:06 बजे तक रहेगा। कुल अवधि लगभग 16 घंटे 55 मिनट की है।

  • पूजा मुहूर्त प्रारंभ: सुबह 6:11 बजे के आसपास (सूर्योदय के बाद)
  • पूजा मुहूर्त समाप्ति: रात 11:06 बजे (तिथि समाप्ति तक)

कुछ स्थानों पर सूर्योदय के अनुसार समय थोड़ा अलग हो सकता है (जैसे मुंबई या सूरत में 6:28 बजे के आसपास)। राहुकाल और अन्य अशुभ समय से बचकर पूजा करना बेहतर है। अभिजीत मुहूर्त भी शुभ माना जाता है। स्थानीय पंचांग से अपने शहर का सटीक समय अवश्य जांच लें।

गणेश विसर्जन के शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन के लिए भी कई शुभ चौघड़िया उपलब्ध हैं। प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं (दिल्ली या सामान्य संदर्भ में, स्थानीय पंचांग देखें):

  • सुबह: लगभग 6:11/6:28 बजे से 10:42/10:59 बजे तक
  • दोपहर: 12:12/12:13 बजे से 1:43 बजे तक (शुभ चौघड़िया)
  • शाम: 4:44/5:02 बजे से 6:14/6:32 बजे तक
  • रात: 9:14/9:31 बजे से 10:42/11:01 बजे तक

कुछ स्थानों पर रात के बाद भी मुहूर्त मिल सकते हैं। विसर्जन के समय भक्ति भाव से “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या” का उद्घोष किया जाता है।

अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल को साफ करके भगवान विष्णु या अनंत की मूर्ति/चित्र स्थापित करें। गणेश जी की भी पूजा करें।
  3. कलश स्थापना करें।
  4. अनंत सूत्र को दूध, दही, घी, शहद और चीनी (पंचामृत) से शुद्ध करें।
  5. भगवान को फूल, तुलसी दल, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  6. अनंत स्तोत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  7. 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधें और संकल्प लें।
  8. व्रत रखने वाले फल-दूध आदि से पारण करें।

व्रत रखने वाले पूरे दिन उपवास रखते हैं या फलाहार करते हैं। सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।

अनंत चतुर्दशी पर क्या करें और क्या न करें

करें:

  • भगवान विष्णु और गणेश की भक्तिपूर्वक पूजा करें।
  • अनंत सूत्र श्रद्धा से बांधें।
  • दान दें, विशेषकर गरीबों को भोजन या वस्त्र।
  • परिवार के साथ समय बिताएं और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखें।

न करें:

  • अनंत सूत्र को लापरवाही से न तोड़ें।
  • झूठ, क्रोध या हिंसा से बचें।
  • राहुकाल में मुख्य पूजा न करें।
अनंत चतुर्दशी

क्षेत्रीय महत्व और आधुनिक संदर्भ

महाराष्ट्र में अनंत चतुर्दशी गणेश विसर्जन के भव्य जुलूस के लिए प्रसिद्ध है। मुंबई, पुणे जैसे शहरों में लाखों लोग शामिल होते हैं। दक्षिण भारत में इसे अनंत पद्मनाभ व्रत के रूप में मनाया जाता है। उत्तर भारत में विष्णु पूजा और सूत्र बांधने पर अधिक जोर रहता है।

आधुनिक समय में लोग इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियों का उपयोग बढ़ा रहे हैं ताकि पर्यावरण की रक्षा हो। ऑनलाइन पूजा सामग्री और लाइव विसर्जन भी लोकप्रिय हो रहे हैं।

निष्कर्ष

अनंत चतुर्दशी 2026 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। 24 सितंबर को तिथि शुरू होने के बावजूद उदयतिथि के कारण 25 तारीख ही मान्य है। पूजा मुहूर्त सुबह से रात तक उपलब्ध रहेगा। इस दिन भगवान विष्णु की अनंत कृपा और गणपति जी का आशीर्वाद दोनों प्राप्त करने का अवसर है। अनंत सूत्र बांधकर संकल्प लें कि आपका जीवन भी अनंत सुख-समृद्धि से परिपूर्ण हो।

सभी भक्तों को अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन की हार्दिक शुभकामनाएं। गणपति बप्पा मोरया!

Disclaimer

यह लेख विभिन्न पंचांग स्रोतों और धार्मिक परंपराओं पर आधारित है। स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें।

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