AI से नौकरियों पर संकट, कंपनियों में छंटनी

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बढ़ता AI और घटती नौकरियां? Oracle समेत इन कंपनियों में छंटनी, इतने लाख हुए बेरोजगार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया तेजी से बदल रही है। कंपनियां अरबों डॉलर AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर्स और नए मॉडल पर खर्च कर रही हैं, लेकिन इसी के साथ बड़े पैमाने पर छंटनी भी हो रही है। सितंबर 2026 में Oracle जैसी दिग्गज कंपनी में फिर से लेऑफ शुरू होने की खबर ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है—क्या AI नौकरियां खत्म कर रहा है या सिर्फ उन्हें बदल रहा है?

Oracle की बड़ी छंटनी: AI को दोष

Oracle ने अपने 2026 वित्तीय वर्ष (31 मई 2026 को समाप्त) में करीब 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की। कंपनी का वर्कफोर्स लगभग 1,62,000 से घटकर 1,41,000 रह गया, यानी करीब 13% की कमी। कंपनी ने अपने SEC फाइलिंग में साफ लिखा कि “AI तकनीकों के अपनाने और तैनाती के कारण हमारी वर्कफोर्स में कमी आई है और आगे भी हो सकती है।”

सितंबर 2026 के मध्य में Oracle ने नई राउंड की छंटनी शुरू कर दी। प्रभावित कर्मचारियों को सुबह के ईमेल में बताया गया कि “आज आपका आखिरी वर्किंग डे है।” कुछ टीमों में डबल-डिजिट प्रतिशत की कटौती की बात सामने आई। कंपनी AI क्लाउड और डेटा सेंटर्स पर भारी निवेश कर रही है—पहली तिमाही में ही कैपिटल एक्सपेंडिचर 28.5 अरब डॉलर रहा, जबकि पूरे साल का लक्ष्य 90-95 अरब डॉलर है। क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर रेवेन्यू में 121% की वृद्धि हुई और AI कॉन्ट्रैक्ट्स में 30 अरब डॉलर से ज्यादा के नए ऑर्डर मिले। यानी कंपनी बढ़ रही है, लेकिन पारंपरिक भूमिकाओं में लोगों की जरूरत कम हो रही है।

रिसर्च एंड डेवलपमेंट, सेल्स-मार्केटिंग और कुछ क्लाउड-सर्विसेज टीमों में सबसे ज्यादा कटौती हुई। Oracle Health (Cerner अधिग्रहण) में भी हजारों पद प्रभावित हुए। कंपनी ने रिस्ट्रक्चरिंग पर 1.8 अरब से लेकर 2.8 अरब डॉलर तक खर्च का अनुमान लगाया है।

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वैश्विक टेक सेक्टर में छंटनी का आंकड़ा

Layoffs.fyi जैसे ट्रैकर्स के अनुसार, 2026 में सितंबर के मध्य तक दुनियाभर में 1.28 लाख से ज्यादा टेक कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है (करीब 300 कंपनियों में)। यह आंकड़ा पूरे 2025 के कुल लेऑफ (लगभग 1.22 लाख) से पहले ही आगे निकल चुका है।

कुछ प्रमुख कंपनियां और उनके आंकड़े (2026 में रिपोर्टेड):

  • Oracle: 21,000+
  • Amazon: लगभग 17,000
  • Dell: 11,000
  • Meta: लगभग 10,400
  • Microsoft: 4,800+
  • PayPal, Uber, Cisco, Intuit आदि में भी हजारों की छंटनी

कई कंपनियां सीधे AI को वजह बता रही हैं। कुछ जगहों पर एंट्री-लेवल जॉब्स और सपोर्ट रोल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। चैटबॉट्स, ऑटोमेटेड सिस्टम और AI एजेंट्स कई दोहराए जाने वाले कामों को संभाल रहे हैं।

भारत पर असर

भारत में स्थिति थोड़ी मिश्रित है। कुछ रिपोर्ट्स (जैसे Nomura) के अनुसार AI से जुड़ी हायरिंग लेऑफ से ज्यादा रही है—करीब 83,100 नई भर्तियां बनाम 31,921 लेऑफ/एट्रिशन। लेकिन भारतीय IT कंपनियों में नेट हायरिंग काफी धीमी पड़ गई है। पहले जहां साल में 5-6 लाख नई नौकरियां जुड़ती थीं, वहां अब यह आंकड़ा बहुत कम हो गया है। फ्रेशर्स और कैंपस हायरिंग में कमी साफ दिख रही है। Oracle, Microsoft जैसी कंपनियों की भारत में भी कटौती की खबरें आई हैं।

IT सेक्टर में सपोर्ट, टेस्टिंग, बेसिक कोडिंग और कुछ मिडिल-मैनेजमेंट रोल सबसे ज्यादा दबाव में हैं। वहीं AI, क्लाउड, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में मांग बनी हुई है।

क्यों हो रही है यह छंटनी?

  • AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च: कंपनियां डेटा सेंटर्स, GPU और पावर पर अरबों खर्च कर रही हैं। पेरोल कम करके कैपिटल खर्च बढ़ाया जा रहा है।
  • प्रोडक्टिविटी बढ़ाना: AI से एक व्यक्ति ज्यादा काम कर सकता है। कई कंपनियां कहती हैं कि वे “राइट साइज” कर रही हैं।
  • ओवर-हायरिंग का असर: कोविड के बाद की भर्ती अब सही की जा रही है।
  • रणनीतिक बदलाव: पारंपरिक सॉफ्टवेयर से क्लाउड और AI-फर्स्ट मॉडल की ओर रुख।
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क्या AI सिर्फ नौकरियां खत्म कर रहा है?

यह सवाल जटिल है। कई विशेषज्ञ कहते हैं कि AI नौकरियां खत्म नहीं बल्कि बदल रहा है। नई भूमिकाएं बन रही हैं—AI ट्रेनर, प्रॉम्प्ट इंजीनियर, AI एथिक्स स्पेशलिस्ट, डेटा सेंटर ऑपरेटर्स आदि। मैकिंजी जैसी रिपोर्ट्स में कहा गया है कि AI से होने वाले जॉब लॉस पहले के अनुमान से कम रहे हैं, लेकिन भविष्य में और दबाव बढ़ सकता है।

वहीं दूसरी तरफ, एंट्री-लेवल और मिड-लेवल कर्मचारियों के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं। युवा सॉफ्टवेयर डेवलपर्स (22-25 साल) के रोजगार में गिरावट की खबरें आई हैं। कंपनियां अनुभवी लोगों को प्राथमिकता दे रही हैं जो AI टूल्स के साथ बिजनेस कॉन्टेक्स्ट समझते हों।

भविष्य की तस्वीर और सुझाव

AI क्रांति अपरिहार्य है। जो लोग खुद को अपस्किल करेंगे—AI टूल्स सीखेंगे, डोमेन नॉलेज बढ़ाएंगे और क्रिएटिव/स्ट्रैटेजिक स्किल्स विकसित करेंगे—उनके लिए अवसर भी खुलेंगे। सरकारों और कंपनियों को री-स्किलिंग प्रोग्राम्स पर जोर देना होगा। भारत जैसे देश में IT वर्कफोर्स बहुत बड़ा है, इसलिए ट्रेनिंग और नए क्षेत्रों में शिफ्ट जरूरी है।

निष्कर्ष यह है कि AI से कंपनियों की प्रोडक्टिविटी और मुनाफा बढ़ रहा है, लेकिन अल्पकाल में हजारों-लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं। Oracle जैसी कंपनियों की छंटनी सिर्फ एक उदाहरण है। 2026 में टेक सेक्टर में पहले ही 1.28 लाख से ज्यादा नौकरियां चली गई हैं। सवाल यह नहीं कि AI आएगा या नहीं, सवाल यह है कि हम इसके साथ कैसे तालमेल बिठाएंगे। कर्मचारियों को निरंतर सीखते रहना होगा, कंपनियों को जिम्मेदार संक्रमण सुनिश्चित करना होगा और नीति-निर्माताओं को सुरक्षा जाल तैयार रखना होगा।

यह बदलाव सिर्फ तकनीक का नहीं, बल्कि काम करने के तरीके का है। जो इसे समझकर खुद को तैयार करेंगे, वे आगे बढ़ेंगे। जो नहीं करेंगे, उनके लिए चुनौतियां बढ़ेंगी।

Disclaimer

यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्ट्स, कंपनी फाइलिंग्स और लेऑफ ट्रैकर्स (जैसे Layoffs.fyi) पर आधारित है। आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं। Oracle समेत कंपनियों की छंटनी और AI के प्रभाव की जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से ली गई है। यह किसी निवेश, करियर या कानूनी सलाह के रूप में नहीं है। पाठक अपनी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार स्वतंत्र शोध करें। लेखक या प्रकाशक किसी भी निर्णय से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। AI और रोजगार का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, इसलिए नवीनतम जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों की जांच अवश्य करें।

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